Meet Versha Verma: The Prolific Hindi Poet on YourQuote

This lady, who plays with words and fills them with colors, has already got her book “Shabd mere kavita tere naam ki” published. Our writer Raju Ranjan caught up with her and found out the unsaid story behind her writings, with ‘pain’ as one of the top tags, on YourQuote.

VERSHA VERMA JI! एक उदीयमान चरित्र जिनसे मुझे हाल के दिनों में रूबरू होने का अवसर मिला। शुरुआत में उनकी बातें सहज लगीं और वो नादान बालक सी प्रतीत हुईं। थोड़ा जानने और समझने के बाद मैंने पाया कि वो बहुमुखी प्रतिभा से लबरेज़ एक ऐसा व्यक्तित्व हैं जिस पर हर नारी को ही नहीं, हर नर को भी गर्व होना चाहिये।

मैं, राजु रंजन, थोड़ा चिंतित हूँ अपने अल्प ज्ञान से, जब आज मैं निकला हूँ एक ऐसी शख्सियत का साक्षात्कार करने, एक ऐसे व्यक्तित्व को निहारने, जो अपने आप में हिमालय सरीखा जान पड़ता है। उम्मीद है वो एक नारी का दिल दिखाएंगी और मेरे सभी सवालों को स्वीकार करेंगी।

यह मेरे लिये वाक़ई सौभाग्य और गौरव की बात है…

Raju: VERSHA JI! सबसे पहले आपको मेरा प्रणाम। क्या आप तैयार हैं उन पहलुओं को हमसे साझा करने के लिये जिनके ज़रिये आपने विभिन्न प्रकार के कार्यों को निष्पादित कर अपने जीवन में चरमोत्कर्ष की अनुभूति प्राप्त की? अगर आप सहज हों मेरे साथ तो क्या मैं शुरु करूँ अपने चंद सवाल, तांकि समाज के जूझ रहे नौजवानों के लिए आपकी जीवनी एक प्रेरणा का काम कर सके?

आपकी इजाज़त मिले कि बस मैं हाजिर हो जाऊँगा अपने चंद सवालों के साथ.

VERSHA JI:- इज़्ज़त अफ़ज़ाई के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया। सच कहूँ तो सवालों से तो मैं कब से घिरना चाहती थी, सौभाग्य मेरा कि आप घेर रहे हैं मुझे। मेरी कोशिश रहेगी कि मैं आपके सभी सवालों के जवाब सहजता से दे सकूँ। आपके सवालों के इंतज़ार में……

Q:- Aap ko kab se lekhni se anurag hua?

A:- मेरे प्यार के अंकुर (नंदिनी मेरी बेटी) और मेरी पहली कविता, दोनों ने मेरी ज़िन्दगी में एक साथ कदम रखा।

Q:- Matlab aapki beti ka aana aapke andar ek kavyitri ko jaga gaya, aesa kuchh maanti hain?

A:- जी बिल्कुल!

Q:- Kya aapko saahitya ki kitaabon mein kabhi ruchi rahi? Agar haan, to wo pahli kitaab kaun si thi jisne aap mein uttejna paida ki?

A:- एक ईमानदार खिलाड़ी होने के नाते मेरी रुचि केवल खेल में रही, पर समय बदला और समय के साथ मन भी। ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव ने चंचल मन को सोचना और लिखना सिखा दिया। लिखे हुए शब्दों ने कब कविता का रूप लिया, पता ही नहीं चला। पहली कविता की किताब आदरणीय कुमार विश्वास जी की पढ़ी और साहित्य में ‘गोदान’ किताब पढ़ी। गुलज़ार जी की लिखी हुई पंक्तियों से सबसे ज़्यादा प्रभावित हूँ। उनकी पंक्तियों की सरलता दिल को छू जाती है।

Q:- Sabse khaas baat kya lagi writing ke baare? Kitni shiddat se aap poojti hain ise?

A:- जब आप लिखते हैं, तो आप किसी से ये नहीं कह सकते कि कागज़ और कलम के अलावा आपका कोई प्रिय मित्र है क्योंकि दुःख, सुख और ज़िन्दगी के हर पहलु से आपकी कलम वाकिफ़ रहती है, कोई डिमांड भी नहीं करती।

Q:- Koi sabse mazedaar lamha aapke jeevan ka, jise aapne khud mein hi kaid kar rakha hai? Vinamr nivedan hai ki mere saath sajha karein.

A:- कलम मेरी धड़कन और कागज़ मेरी रूह, ये अहमियत है मेरे जीवन में लिखने की।

सबसे मज़ेदार तो नहीं कहेंगे पर हाँ, अभी हाल ही की बात है। मेरी किताब का विमोचन होने वाला है, तो मैं अपने दोस्तों को फ़ोन करके निमंत्रण दे रही थी। ज़्यादातर दोस्त मुझसे यह कह कर मेरी हंसी उड़ा रहे थे कि “तेरे जैसी लड़की किताबें फाड़ तो सकती है पर लिख नहीं सकती। तेरे पास इतना दिमाग है भी कि तू कुछ गहराई से सोच सके और फिर लिख सके?”

Q:- Jab aapka uphaas uda doston ke beech, to kaun si aesi cheez thi jo aapko tab bhi prerit karti rahi lekhni kayam rakhne ke liye?

A:- My positive attitude. अगर दोस्त लोग सीधे से आपकी बात मान लें और मज़ाक न बनाएँ तो समझ लेना चाहिए कि दोस्त दिखावटी हैं।

Q:- Aap ishwar ke diye anmol jeevan ko kis novel mein dekhti hain, jisme aapka chehra saaf dikhta ho?

A:- चूँकि ज़्यादा साहित्य पढ़ा नहीं है, इसलिए फिलहाल किसी किताब में अभी तक अपना चेहरा नहीं दिखाई दिया।

Q:- Aap YourQuote jaise vikhyaat manch par khud ek sadasya hain, aapko kahan se jaankari hasil huyi YourQuote ki?

A:- मेरी बड़ी दीदी की बेटी, ‘शगुन’ भी लिखती है। उसी ने मुझे YQ से अवगत करवाया।

Q:- Kya aap kisi ek lekhak ka naam lena chahengi jinhone aapko behad prabhavit kiya YourQuote par, jinhone aapki haunsla afzaayi ki aur aapne bhi unke sansarg ko saraha?

A:- जी बिल्कुल! अनूप कमल अग्रवाल जी, जय कुमार, पुष्पेंद्र जी।

Q:- Lekhni ki vajah se kya kabhi aapka career ya family prabhavit huye?

A:- आप लोगों ने ना सिर्फ मुझे सुना बल्कि मेरी हिंदी में होने वाली गलतियों को समझाया और सराहा भी।

Q:- Jaisa ki hum jante hain, lekhni ke liye ek bhav ka hona behad mahatvapurn hai. Aapke andar kaun sa aesa bhav hai jo aapki lekhni mein haavi nazar aata hai? Veer ras, prem ras ya koyi aur?

A:- किसी एक भाव में ना मेरी लेखनी बंधी है, ना मेरी कविताएँ। फिर भी, मुझे लड़कियों पे या प्रेम रस पे लिखना अच्छा लगता है।

Q:- Kya kabhi koi baadha aapne face ki lekhni mein, apne doosre kaaryon ki vajah se ya family ki vajah se?

A:- मेरे जीवन में कई ऐसी घटनाएँ हुईं जिन्होंने मुझे अंदर से खोखला कर दिया था, सही समय पर यदि कलम और कागज़ ने सहारा न दिया होता तो मैं शायद depression में चली जाती। जो लोग मुझे जानते हैं, उनका कहना है कि “अच्छा है कि सारी negativity तुम कलम के द्वारा कागज़ पे निकाल देती हो और जीवन में खुश रह कर आगे बढ़ती हो।” इस हिसाब से लेखनी कभी मेरे जीवन में बाधा नहीं बनी बल्कि वरदान बन कर आई।

Q:- Jaisa ki aap documentary filmon mein kaam kar chuki hain, aapko gaane likhne ka shaunk hai, ek gaana aapka shamil bhi hua ek film mein aur aap gair sarkaari sangthan mein bhi apna sewa bhaw de rahi hain; to lekhni aur fir upar se ghar pariwaar… sabkuch ek sath! Kaise aap taalmael baithati hain vibhinn zimmedaariyon mein?

A:- ये सवाल मैं खुद से करती हूँ, जवाब में सिर्फ एक समझदार बेटी और loving and caring husband का चेहरा सामने आता है।

Q:- Aap ek aesi cheez ke baare mein bataein jise aapne khud ke liye khoja YourQuote par?

A:- YQ पे सबसे अच्छी बात ये है कि अगर आपके लिखने में कोई त्रुटि होती है, तो आपको कई लोग तुरंत सही करके बताते हैं, साथ ही आपकी हौंसला अफ़ज़ाई भी भरपूर करते है।

Q:- Ek do aadatein bataein jo aapke hisaab se lekhni mein aur jaan daal deti hain?

A:- एक ही रस में सीमित ना होकर हर टॉपिक पे लिखना; साथ ही, किसी से भी बात करते समय उनके नए शब्दों को चुन कर immediately उस पर कविता लिखना। इससे आपकी कलम में नयापन बना रहता है और आपका शब्द कोष भी भरता है।

Q:- Aapka priya possession? Tell a few lines.

A:- “शब्द मेरे, कविता तेरे नाम की”
“पहली कोशिश मेरे हुनर के नुमाइश की”

Q:- Aap ki kitaab “Shabd mere, kavita tere naam ki” ka lokaarpan jald hi hone wala hai, aap ise kinhein samarpit karna chahengi?

A:- “मेरे हुनर की नुमाइश के लिए, क्या तेरा इस दुनिया से विदा लेना ज़रूरी था?”

मेरी छोटी बहन जो कि अब इस दुनिया में नहीं है; मैंने लिखना इस हादसे के बाद ही शुरू किया। इसलिए ये किताब भी उसी को समर्पित।

Q:- Madam aapse ek last sawaal. Aap vriksh ropan aur rakt daan ke kaamon mein ruchi leti aayin hain. Aap kinse prerit huin?

A:- अपने NGO से, जिससे मैं लोगों की मदद कर पाती हूँ। सड़क के किनारे घायल लोगों को अस्पताल पहुँचा, उनकी देख रेख करती हूँ। बचपन से ही मैं Mother Teresa जी से बहुत प्रभावित थी। प्लांटेशन और ब्लड डोनेशन समाज में बढ़ते बदलाव और परिवार में माता पिता के दिए हुए संस्कार का फल हैं।

Q:- Madam maine aapka kaafi samay liya, kahin aapko zyada pareshaani to nahin hui?

A:- मुझे किसी को इतने डिटेल्स के साथ अपना इंटरव्यू देने का पहला मौका मिला, सच कहें तो मुझे कुछ पता भी नहीं था कि क्या, कैसे होना है पर आपने इतनी सरलता के साथ मेरे हर पहलु पे रोशनी डालते हुए, मेरे कम्फर्ट लेवल का ध्यान रखते हुए अपने इंटरव्यू लेने के हुनर को दर्शाया है। आपका तहे दिल से मैं धन्यवाद करती हूँ।

Raju:- Thank you so much madam.

Versha ji:- Aapki hindi bahut achchi hai!

Raju: Thank you again ma’am! Ye meri past struggle; mere nana aur maa ke diye sanskaaron ka asar hai.

नीचे हैं वर्षा जी के कुछ खूबसूरत कोट्स जिन्हें आप ज़रूर पढ़ना चाहेंगे:

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